Saturday, March 6, 2010

गदहिया गोल

ब्लॉग बनाये हुए काफी दिन हो गए लेकिन लिखा कुछ भी नहीं ....ऐसा नहीं है की टाइम नहीं मिला ....मिला था... पर जैसे ही मै कुछ लिखने जाती तो सोचती की ब्लॉग लिखने से पहले देख तो लूँ कि ब्लॉग लिखते कैसे हैं .....बहुत से ब्लॉग पढ़ डाले मैंने ....फिर तो उन्हें पढ़ने में ही उलझ के रह गयी मै ...अच्छा लगा ब्लॉग जगत में आकर ....कितना अच्छा लिखते हैं लोग ...मैं तो वैसा कभी नहीं लिख पाऊँगी....हाँ पर अपने जैसा लिखने कि कोशिश जरुर करुँगी ...जब मैंने स्कूल जाना शुरू किया था तो मै किसी भी क्लास में जाकर बैठ जाती थी क्योंकि मै तब छोटी थी और मेरा नाम किसी भी क्लास में नहीं लिखवाया गया था...मुझे गुस्सा आता था कि सबकी कोई न कोई क्लास है और मै किसी भी क्लास में जाकर बैठ जाती हूँ ...तो मम्मी कहती थी कि तुम्हारा अभी गदहिया गोल है ...मतलब सब गलतियाँ माफ़ ...तो ब्लॉग जगत में ये मेरा गदहिया गोल है ....इसलिए यहाँ भी मेरी गलतियों को माफ़ किया जाये ...अभी लिखने को बहुत कुछ है ..बस ये समझ नहीं आ रहा कि कहाँ से शुरू करूँ ...
अभिव्यक्ति के आकाश में एक छोटी सी आवाज हमारी भी है ...शुरू करते हैं अपने अपने रास्ते कि खोज

14 comments:

  1. ब्‍लाग जगत में आपका स्‍वागत है। अपनी मन की लिखे फिर उसके लिए शब्‍द स्‍वत: चले आएंगे।

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  2. a first step is always like that.

    wish you good luck for the journey on web.

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  3. "गदहिया गोल है" आकर्षक लगी - हार्दिक शुभकामनाएं

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  4. महारे राजस्थान में एक कहावत है कि "गिरते पड़ते तो पत्थर भी महादेव बन जाते हैं।"
    बस एक दिन गदहिया गोल नहीं रहेगा।
    शुभकामनायें।

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  5. सफल होने के लिये सबसे ज़रुरी चीज़ क्या होती है ?
    पहला कदम बढाना।
    इसलिये लिखना शुरु करिये बस

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  6. Aap sabhi logo ka dil se Dhanyawad.

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  7. इस सुन्दर चिट्ठे के साथ आपका ब्लॉग जगत में स्वागत .....

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  8. हंस कर जी कर सुमन बन |
    सपने कर आबाद ||
    इस सुमन का मोल क्या |
    मुरझाने के बाद ||

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  9. Anek shubhkamnayen! Aap aage chalke zaroor bahut achha likhtee rahengi...honhaar biwaanke chikne paat to abhi hee nazar aa rahe hain!

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  10. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

    कलम के पुजारी अगर सो गये तो

    ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

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  11. बहुतई अच्‍छा लिखत बानू, लेखनी बिलकुलई ठीक बानी। अइसई लिखत रही। भोजपुरी माटी के एक पौध को हमारी ओर से बहुत बहुत बधाई।
    धन्‍यवाद।

    सुनील पाण्‍डेय

    इलाहाबाद।

    09953090154

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  12. इस शुरुआत पर तमाम शुभकामनाएं.
    जारी रहें.

    [उल्टा तीर]

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  13. इस नए चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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